आगमः · Receive
आचार्य से ध्यानपूर्वक सुनकर शब्द, अर्थ और सम्बन्ध समझना।
Learn attentively from a teacher and receive the text with its meaning.
रूप-अध्ययन / Study forms →
विश्ववैदिकविद्यापीठम् · Learn & apply
Sanskrit Prajñā Tantram
संस्कृत सीखें, शास्त्रों को समझें और ज्ञान का उपयोग जीवन तथा समाज के कल्याण में करें।
प्रारंभिक वेब-अभ्यास उपलब्धमहाभाष्य में वर्णित चार अध्ययन-कालों से प्रेरित · Learning framework
Receive · Internalise · Express · Apply
हमारी अध्ययन-पद्धति: ग्रहण करें, आत्मसात् करें, समझाकर व्यक्त करें और उपयोग में लाएँ। श्रवण, आचार्य से सीखने अर्थात् आगम का अंग है। नीचे के संक्षिप्त शीर्षक और अर्थ हमारे शिक्षण-प्रयोग हैं, महाभाष्य का अक्षरशः उद्धरण नहीं।
आचार्य से ध्यानपूर्वक सुनकर शब्द, अर्थ और सम्बन्ध समझना।
Learn attentively from a teacher and receive the text with its meaning.
रूप-अध्ययन / Study forms →पुनरावृत्ति, विचार और अभ्यास से सीखे हुए को दृढ़ करना।
Review, reflect and practise to strengthen understanding.
अभ्यास / Practise →सीखे हुए विषय को अपने शब्दों में स्पष्ट करना और दूसरों को समझाना।
Explain what you have learned clearly and share understanding with others.
संस्कृत और शास्त्रीय ज्ञान का विवेकपूर्वक जीवन एवं लोककल्याण में प्रयोग करना।
Apply language and knowledge thoughtfully in life and for social well-being.
उद्देश्य / Purpose →चार काल: आगमकाल, स्वाध्यायकाल, प्रवचनकाल और व्यवहारकाल। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का शैक्षिक सन्दर्भ / Educational reference →
यह भाषा-विकल्प परिचय और उपयोग-निर्देश के लिए है। अभ्यास एवं खोज-परिणामों की भाषा अलग हो सकती है। सुनने की सुविधा ब्राउज़र की उपलब्ध आवाज़ पर निर्भर है; संस्कृत उच्चारण शिक्षक से मिलाएँ। कुछ आवाज़ें ऑनलाइन सेवा का उपयोग कर सकती हैं। / Guide language and exercise language may differ. Audio depends on available browser voices and may use an online service.
अभी उपयोग करें: राम-शब्द के रूप, भू-धातु का लट्, १२ शब्दों का बहुभाषी शब्दाभ्यास और ६ प्रश्नों का स्वाध्याय। स्वतन्त्र AI प्रश्नोत्तर और पूर्ण रूपसिद्धि-सुविधा विकासाधीन हैं।
अकारान्तः पुंलिङ्गः · सात विभक्तियाँ तथा सम्बोधन। यहाँ “राम” प्रातिपदिक है।
रामः पठति। — राम पढ़ता है।
अहं रामं पश्यामि। — मैं राम को देखता/देखती हूँ।
रामस्य पुस्तकम्। — राम की पुस्तक।
“रामम्” पदान्त में वाक्य की संहिता के अनुसार “रामं पश्यामि” दिखता है। कारक और विभक्ति का सम्बन्ध प्रसंग तथा नियम से निर्धारित होता है; हर विभक्ति को एक ही हिन्दी परसर्ग से नहीं बाँधना चाहिए।
लट्-लकारः · परस्मैपदम् · सामान्य वर्तमानकाल का परिचय।
सः भवति। · त्वं भवसि। · अहं भवामि।
संस्कृत का प्रथमपुरुष English के third person के अनुरूप है; मध्यमपुरुष second person और उत्तमपुरुष first person के अनुरूप है।
ये आरम्भिक अर्थ हैं; पूरा अर्थ और लिङ्ग प्रसंगानुसार पढ़ें। अर्थ की भाषा के लिए हिन्दी, English या తెలుగు चुनें।
केवल अंतिम अंक इसी ब्राउज़र में सहेजे जाते हैं; खाता बनाने की आवश्यकता नहीं है।

महर्षि पाणिनि अष्टाध्यायी के रचयिता वैयाकरण हैं। आठ अध्यायों की सूत्र-व्यवस्था में संज्ञा, परिभाषा, प्रत्यय, रूप और नियमों के परस्पर सम्बन्ध का अध्ययन किया जाता है। उनके जीवन की निश्चित जन्म–मृत्यु तिथियाँ यहाँ नहीं दी गई हैं।
Maharshi Pāṇini is the grammarian associated with the Aṣṭādhyāyī. Its eight chapters organise a concise system of grammatical rules. Our aim is to connect learning with meaning, use and rule-based explanation. The current web exercises do not yet provide complete derivations.
“रामः” देखकर उसके प्रातिपदिक, लिङ्ग, विभक्ति और वचन की पहचान करना पहला चरण है। सूत्र-सन्दर्भ सहित प्रत्यय, आदेश और ध्वनि-परिवर्तन का विस्तृत अध्ययन आगे की विकास-दिशा है।
पाणिनीय सूत्रपाठ-संसाधन / Text resources →हमारा उद्देश्य केवल रूप याद करवाना नहीं है। संस्कृत के माध्यम से व्याकरण, दर्शन, आयुर्वेद और अन्य ज्ञानपरम्पराओं का मूल पाठ समझना, प्रश्न करना और उपयोगी विचारों को विवेकपूर्ण ढंग से जीवन में लाना इसका लक्ष्य है। प्राचीन कथन, ऐतिहासिक विवरण और आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाण को अलग पहचानकर पढ़ना भी इसी अध्ययन का अंग है।
अभी: सीमित रूप-सारिणियाँ, शब्दार्थ और स्वाध्याय। अगले चरण: अधिक शब्द–धातु, समीक्षित उच्चारण, सूत्र-आधारित रूपसिद्धि, शास्त्रीय संदर्भ और विस्तृत बहुभाषी सहायता। Android ऐप का संस्करण और ये वेब-अभ्यास अलग हैं।
पाठ्यक्रम देखें → · सुझाव एवं शैक्षिक सहयोग →वर्ण और उच्चारण से आरम्भ करके शब्द, सरल वाक्य, शब्दरूप और धातुरूप का अभ्यास करें। संस्कृत प्रज्ञा में आरम्भिक शब्दावली, राम शब्दरूप, भू धातुरूप और अभ्यास उपलब्ध हैं। क्रमबद्ध अध्ययन के लिए संस्कृत पाठ्यक्रम देखें।
Begin with letters and pronunciation, then practise words, simple sentences, noun forms and verb forms. Explore introductory vocabulary, Rāma forms and bhū conjugation on this page.
पुस्तक एवं कोश-संग्रह में पाणिनीय व्याकरण, अध्ययन–शोध शब्दावली, उपनिषद् और दर्शन के ग्रन्थ खोजें।
Browse our books and lexicons for Pāṇinian grammar, research terminology, Upaniṣads and philosophical studies.