विश्ववैदिकविद्यापीठम् · भारतीय ज्ञानपरम्परा · अनुसन्धान एवं प्रौद्योगिकी | IKS · Research & Technology

विश्ववैदिकविद्यापीठम् · Classical Ayurveda study

आयुर्वेदप्रज्ञातन्त्रम्

मूल संहिताओं से आयुर्वेद का प्रामाणिक अध्ययन

Study Ayurveda through its classical sources.

चरकसंहिता, सुश्रुतसंहिता, धन्वन्तरिनिघण्टु तथा वाग्भट-परम्परा के ग्रन्थों से आयुर्वेद का अध्ययन।

आयुर्वेदप्रज्ञातन्त्रम् का स्वीकृत कमल–ग्रन्थ चिह्न

आयुर्वेद का प्रयोजन · The purpose of Ayurveda

स्वास्थ्यरक्षा और रोग-प्रशमन

प्रयोजनं चास्य स्वस्थस्य स्वास्थ्यरक्षणमातुरस्य विकारप्रशमनं च॥२६॥

चरकसंहिता · सूत्रस्थान ३०.२६ — पूर्ण गद्यवचन / Complete prose statement

अर्थ: इसका (आयुर्वेद का) प्रयोजन स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के विकारों का प्रशमन करना है।

Meaning: The purpose of Ayurveda is to preserve the health of the healthy and alleviate the disorders of the ill.

मूल अध्याय एवं संदर्भ / Source chapter →

यह आयुर्वेद-शास्त्र का उद्देश्य है। इस पटल का वर्तमान कार्य मूल ग्रन्थों का अध्ययन और स्रोत-सहित जानकारी देना है; व्यक्तिगत चिकित्सा का निर्णय योग्य चिकित्सक करता है।

दीर्घायु की वैदिक प्रार्थना · Vedic prayer for long life

शुक्लयजुर्वेद ३६.२४ — पूरा मन्त्र

तच्चक्षुर्देवहितं पुरस्ताच्छुक्रमुच्चरत्। पश्येम शरदः शतं जीवेम शरदः शतꣳ शृणुयाम शरदः शतं प्र ब्रवाम शरदः शतमदीनाः स्याम शरदः शतं भूयश्च शरदः शतात्॥२४॥

स्वरचिह्नों के बिना अध्ययन-पाठ। प्रार्थना-अंश का सरल भाव: हम सौ शरद् तक देखते, जीते, सुनते और बोलते रहें; अदीन रहें और सौ वर्षों से आगे भी जीवन प्राप्त करें। यह प्रार्थना-अंश का भाव है; आरम्भिक पदों की सम्पूर्ण भाष्य-व्याख्या नहीं।

Sense of the prayer portion: May we see, live, hear and speak for a hundred autumns; may we remain undiminished and live beyond a hundred autumns. The complete mantra is printed above without Vedic accent marks; this explanation summarises its prayer portion.

वेदमन्त्र एवं भाष्य / Vedic text and commentary →

यह आरोग्य और दीर्घायु की प्रार्थना है, निश्चित आयु या कभी रोग न होने की गारंटी नहीं। / A prayer, not a guarantee of a particular lifespan or freedom from illness.

शास्त्रीय विषय एवं औषधीय संदर्भ खोजें

चयनित संदर्भ: चरक से स्थौल्य एवं लेखनीय वर्ग; सुश्रुत से स्वास्थ्य की परिभाषा; धन्वन्तरिनिघण्टु से शुण्ठी–आर्द्रक के पर्याय एवं वर्णन। यह ग्रन्थ-अध्ययन है, रोग-निदान या व्यक्तिगत औषधि-निर्धारण नहीं।

माइक्रोफोन केवल बटन दबाने पर शुरू होगा। आपके ब्राउज़र की speech service ऑडियो ऑनलाइन भेज सकती है। निजी स्वास्थ्य-विवरण न बोलें। केवल लिखित प्रश्न की जाँच के बाद खोज करें। / Browser speech services may process audio online. Review the transcript before searching. Search covers the selected references listed below.

उदाहरण:

हिन्दी, English या తెలుగు के समर्थित शब्दों से खोजें; परिणामों की व्याख्या हिन्दी में है। नाम, रिपोर्ट या निजी विवरण न लिखें। लिखित खोज इसी ब्राउज़र में होती है; बोलकर लिखने की सेवा ऑडियो ऑनलाइन भेज सकती है।

खोज में क्या उपलब्ध है? / What can I search?

मूल पाठ: चरक से स्थौल्य और लेखनीय वर्ग; सुश्रुत से स्वास्थ्य की परिभाषा; धन्वन्तरिनिघण्टु से शुण्ठी–आर्द्रक के श्लोक। परिचय: सुश्रुत, धन्वन्तरि, अश्विनीकुमार तथा आयुर्वेद का इतिहास। व्याकरण: स्थौल्य-पाठ के साथ सीमित पदच्छेद एवं अन्वय।

Search provides selected Charaka passages, Sushruta’s definition of health, and Dhanvantari Nighantu passages on ginger, with source links. The sthaulya passage includes a partial Sanskrit reading aid. A complete searchable corpus and personalised treatment service are not available.

कोई परिणाम न मिले तो नीचे विषय-मानचित्र और ग्रन्थ-स्रोत देखें। इससे यह निष्कर्ष न निकालें कि संहिता में विषय नहीं है।

विषय-मानचित्र / Topic map · ग्रन्थ-स्रोत / Text sources

Vishva Vaidika · Digital scholarship

आयुर्वेदप्रज्ञातन्त्रम् के उद्देश्य

Āyurveda Prajñā Tantram

आयुर्वेद के मूल ग्रन्थों तक संदर्भसहित पहुँच।

विकासाधीन · In development

इस अध्ययन-पटल पर ग्रन्थ-परिचय, चयनित चरक–सुश्रुत एवं धन्वन्तरिनिघण्टु संदर्भ और विषय-मानचित्र उपलब्ध हैं। विस्तृत संहिता-खोज और बहुभाषी प्रश्नोत्तर विकासाधीन हैं।

संहिता एवं श्लोक खोज

चरकसंहिता, सुश्रुतसंहिता, धन्वन्तरिनिघण्टु और अन्य आयुर्वेदीय ग्रन्थों में विषय, श्लोकांश, रोग-वर्णन और औषधीय द्रव्यों से संबंधित मूल वचन खोजने का लक्ष्य। प्रत्येक उद्धरण के साथ संहिता, स्थान, अध्याय, पाठ-संख्या और संस्करण का संदर्भ।

अपनी भाषा में प्रश्न

हिन्दी, English और తెలుగు में सामान्य भाषा के प्रश्न समझने की सुविधा विकसित करना। उदाहरण: “स्थौल्य के बारे में चरकसंहिता में क्या कहा गया है?” / “What does Charaka say about sthaulya?” / “స్థౌల్యం గురించి చరకసంహితలో ఏమి చెప్పారు?” आगे अन्य भाषाएँ जोड़ी जाएँगी।

औषधीय द्रव्य एवं पर्याय

ग्रन्थों में वर्णित औषधियाँ, ताजे तथा सूखे फल, मूल, छाल, पुष्प और अन्य द्रव्य; स्रोतसहित संस्कृत पर्याय और समीक्षित क्षेत्रीय नाम।

संस्कृत से स्पष्ट बोध

मूल श्लोक के साथ पदच्छेद, अन्वय, अर्थ और समीक्षित व्याकरण; संस्कृतप्रज्ञातन्त्रम् से अध्ययन का संबंध।

उत्तर की विश्वसनीयता

मूल पाठ और व्याख्या अलग दिखाना, संदर्भ जाँचना और प्रमाण न मिलने पर सीमा स्पष्ट बताना। संहिताओं के औषधीय वर्णन अध्ययन के लिए होंगे; व्यक्तिगत निदान, उपयुक्त औषधि और मात्रा का निर्णय योग्य चिकित्सक करेगा।

अपनी भाषा में परिचय · Read & listen

परिचय पढ़ें / Read guide

यह भाषा-विकल्प परिचय और उपयोग-निर्देश के लिए है। अभ्यास एवं खोज-परिणामों की भाषा अलग हो सकती है। सुनने की सुविधा ब्राउज़र की उपलब्ध आवाज़ पर निर्भर है; संस्कृत उच्चारण शिक्षक से मिलाएँ। कुछ आवाज़ें ऑनलाइन सेवा का उपयोग कर सकती हैं। / Guide language and exercise language may differ. Audio depends on available browser voices and may use an online service.

आयुर्वेद की ज्ञानपरम्परा और इतिहास

यह प्रमुख योगदानों का विस्तारशील परिचय है, सभी व्यक्तियों की सम्पूर्ण सूची नहीं। परम्परागत ज्ञान-सम्प्रदान और ऐतिहासिक ग्रंथ-रचना को अलग पढ़ें। नीचे का प्रदर्शन-क्रम हर व्यक्ति की प्रमाणित जन्म-तिथि या आपसी कालक्रम का दावा नहीं है।

१ · वैदिक संदर्भ और परम्परागत सम्प्रदान

वैदिक साहित्य में भेषज, आरोग्य और अश्विनों से सम्बद्ध संदर्भ मिलते हैं। चरक सूत्रस्थान १ में आयुर्वेद के सम्प्रदान का क्रम ब्रह्मा → दक्ष प्रजापति → अश्विनौ → इन्द्र बताया गया है; भरद्वाज इन्द्र से विद्या ग्रहण करने जाते हैं। यह ग्रंथ का परम्परागत आख्यान है, वर्षों वाली ऐतिहासिक समयरेखा नहीं।

Vedic references and the classical teaching lineage come first here. Charaka’s opening chapter narrates transmission from Brahma through Daksha, the Ashvins and Indra, with Bharadvaja seeking instruction. This is the text’s traditional account, not a dated historical chronology.

चरक सूत्रस्थान १: मूल पाठ एवं परम्परा →

२ · चिकित्सा-शिक्षा की प्रमुख परम्पराएँ

आत्रेय–अग्निवेश परम्परा

पुनर्वसु आत्रेय की शिक्षाएँ और अग्निवेश का तन्त्र चरकसंहिता की पाठ-परम्परा का आधार हैं। आत्रेय के शिष्यों में भेल, जतूकर्ण, पराशर, हारीत और क्षारपाणि भी गिने जाते हैं। सभी के नाम से जुड़े ग्रंथों की उपलब्धता और पाठ-स्थिति समान नहीं है।

Atreya’s teaching and Agnivesha’s treatise underlie the Charaka tradition. Other named pupils include Bhela, Jatukarna, Parashara, Harita and Ksharapani; survival and textual status differ across their associated works.

धन्वन्तरि–सुश्रुत परम्परा

सुश्रुतसंहिता में दिवोदास–धन्वन्तरि से शल्य सहित आयुर्वेद की शिक्षा का संवाद है। इसी कारण पहले धन्वन्तरि और अश्विनीकुमार का परिचय, फिर नीचे चरक तथा सुश्रुत का ग्रंथ-परिचय दिया गया है। दोनों संहिताओं के सभी निर्माण-चरणों को एक निश्चित वर्ष से नहीं बाँधा गया है।

Sushruta’s text presents instruction by Divodasa–Dhanvantari. The earlier teaching tradition is therefore introduced before the compendia. The development of the texts involved multiple stages.

धन्वन्तरि और अश्विनीकुमार · Tradition & texts

भगवान धन्वन्तरि

आयुर्वेद परम्परा में धन्वन्तरि का आदर किया जाता है। सुश्रुतसंहिता के आरम्भिक संवाद में काशी के दिवोदास–धन्वन्तरि शिक्षक रूप में आते हैं। इस ग्रंथीय परम्परा और पुराणों के विभिन्न आख्यानों को उनके अपने सन्दर्भ में पढ़ें।

Dhanvantari is revered in the Ayurveda tradition. The opening of the Sushruta Samhita presents Divodasa–Dhanvantari of Kashi as a teacher. Textual traditions and Puranic narratives should be read in their respective contexts.

सुश्रुत सूत्रस्थान १ / Source →

अश्विनीकुमार · नासत्य और दस्र

अश्विनौ वैदिक जुड़वाँ देवता हैं, जिन्हें परम्परा देववैद्य के रूप में स्मरण करती है। नासत्य और दस्र नामों से उनका परिचय प्रचलित है; वैदिक प्रयोग में नासत्या और दस्रा जैसे द्विवचन-सम्बोधन दोनों के लिए भी आते हैं। अश्व और रथ से उनका सम्बन्ध है, पर हर परम्परा में उन्हें अनिवार्यतः अश्वमुख ही नहीं दिखाया जाता।

ऋग्वेद १.११७.२२ में अश्विनों से सम्बद्ध अश्वशीर्ष की कथा दध्यञ्च आथर्वण के विषय में है। इसलिए अश्वमुख देखकर देवता की पहचान बिना सन्दर्भ के नहीं करनी चाहिए।

The Ashvins are Vedic twin deities, traditionally remembered as divine physicians. Nasatya and Dasra are familiar names; Vedic dual forms can address both. Their connection with horses does not mean every depiction must have horse heads. Rigveda 1.117.22 refers to the horse head of the sage Dadhyanc in a narrative involving the Ashvins.

ऋग्वेद १.११७.२२ / Source →

चरक और सुश्रुत · ज्ञानपरम्परा का परिचय

कल्पित भावचित्र: बाईं ओर चरक औषधीय वनस्पतियों के साथ; दाईं ओर सुश्रुत शल्य उपकरणों के साथ
बाएँ: चरक · दाएँ: सुश्रुत। AI द्वारा निर्मित कल्पित भावचित्र; प्रमाणित ऐतिहासिक मुखाकृतियाँ या उपकरणों की पुरातात्त्विक प्रतिकृतियाँ नहीं।

आचार्य चरक

चरक आयुर्वेद की आत्रेय–अग्निवेश परम्परा के प्रमुख प्रतिसंस्कारक आचार्य हैं। उपलब्ध चरकसंहिता को केवल एक लेखक की एक समय में लिखी पुस्तक मानना ठीक नहीं: अग्निवेश के तन्त्र का चरक ने प्रतिसंस्कार किया और अनुपलब्ध अंशों की पूर्ति दृढबल ने की।

विशेष योगदान: कायचिकित्सा, रोगी-परीक्षा, आहार, औषधीय द्रव्य, स्वास्थ्यरक्षा और चिकित्सकीय विचार का व्यवस्थित अध्ययन।

जीवनकाल: निश्चित जन्म–मृत्यु वर्ष प्रमाणित नहीं हैं। इस वेबसाइट पर कोई एक विवादित वर्ष निश्चित तिथि के रूप में नहीं दिया गया है। गुरु–शिष्य परम्परा और पाठ के विभिन्न निर्माण-चरण अलग समझने चाहिए।

पाठ-परम्परा का स्रोत →

महर्षि सुश्रुत

सुश्रुतसंहिता के आरम्भ में सुश्रुत को काशी के दिवोदास–धन्वन्तरि से आयुर्वेद सीखने वाले शिष्यों में प्रस्तुत किया गया है। यह परम्परागत ग्रंथ-परिचय है। उनका स्वतंत्र, आधुनिक अर्थ में पूर्ण जीवनवृत्त उपलब्ध नहीं है।

विशेष योगदान: शल्यविद्या का शिक्षण, यन्त्र–शस्त्र, शरीररचना, व्रण, बन्धन और चिकित्सक का व्यावहारिक प्रशिक्षण। संहिता में औषधि, आहार और अनेक अन्य चिकित्सा-विषय भी हैं।

जीवनकाल: सुश्रुत और उपलब्ध संहिता के सभी स्तरों को एक निश्चित वर्ष से बाँधना उचित नहीं। जन्मस्थान, जन्मवर्ष और जीवनकथाओं के अप्रमाणित विवरण यहाँ नहीं जोड़े गए हैं।

सुश्रुत सूत्रस्थान १ का अनुवाद →

अन्य प्रमुख आचार्य, ग्रंथ और व्याख्याकार

संहिताओं का संरक्षण, पुनःसम्पादन, व्याख्या, रोग-वर्गीकरण और औषधीय ज्ञान का विस्तार अनेक पीढ़ियों का कार्य रहा है। यह सूची योगदान के क्षेत्र बताती है; प्रत्येक नाम के बीच निश्चित ऐतिहासिक क्रम का दावा नहीं करती।

दृढबल · Dṛḍhabala

चरकसंहिता के अनुपलब्ध अंशों की पूर्ति से जुड़े आचार्य। इससे पाठ-संरक्षण और सम्पादन का योगदान समझ आता है।

Associated with completing missing portions of the Charaka text.

वाग्भट-परम्परा · Vāgbhaṭa

अष्टाङ्गसंग्रह और अष्टाङ्गहृदय आयुर्वेदीय अध्ययन के प्रमुख ग्रंथ हैं। इनके लेखक-सम्बन्ध और पाठ-इतिहास को विस्तार से पढ़ना चाहिए।

The Ashtanga Sangraha and Ashtanga Hridaya are major works associated with the Vagbhata tradition.

माधवकर · Mādhavakara

माधवनिदान रोगों के कारण और लक्षणों के व्यवस्थित अध्ययन का प्रमुख ग्रंथ है।

Madhava Nidana is an important work on disease identification and classification.

शार्ङ्गधर और भावमिश्र

शार्ङ्गधरसंहिता और भावप्रकाश आयुर्वेद की बाद की ग्रंथ-परम्परा के प्रमुख नाम हैं; औषधीय अध्ययन और चिकित्सा-साहित्य के विस्तार में इनका स्थान है।

Sharngadhara Samhita and Bhavaprakasha are influential later contributions.

चक्रपाणिदत्त · Cakrapāṇidatta

चरकसंहिता की आयुर्वेददीपिका टीका से जुड़े प्रमुख व्याख्याकार। टीका मूल पाठ को समझने की अलग विद्वत्-परम्परा है।

A major commentator associated with Ayurveda Dipika on Charaka.

डल्हण और अन्य सुश्रुत-व्याख्याकार

डल्हण का निबन्धसंग्रह तथा गयदास की न्यायचन्द्रिका सुश्रुत के अध्ययन में महत्वपूर्ण टीकाएँ हैं।

Dalhana’s Nibandhasangraha and Gayadasa’s Nyayachandrika belong to the commentary tradition on Sushruta.

अध्ययन-स्रोत / Sources

इन ग्रंथों का उल्लेख अध्ययन-परिचय है; सभी के पूर्ण पाठ अभी इस पोर्टल की खोज में नहीं हैं।

किस ग्रंथ में क्या पढ़ें?

यह परिचयात्मक मानचित्र है। किसी रोग का आधुनिक नाम और संहिता का रोगनाम हमेशा एकार्थक नहीं होते। विवरण खोलकर अध्ययन का क्षेत्र देखें।

चरकसंहिता · ८ स्थान, १२० अध्याय

सूत्रस्थान · ३०

मूल सिद्धान्त, आहार-विहार, द्रव्य और स्वास्थ्य-विचार।

निदानस्थान · ८

रोगों के कारण, पूर्वरूप, रूप और सम्प्राप्ति का अध्ययन।

विमानस्थान · ८

मापन, परीक्षा, आहार तथा चिकित्सकीय अध्ययन की विधि।

शारीरस्थान · ८

शरीर, गर्भ और जीवन के शास्त्रीय विचार।

इन्द्रियस्थान · १२

अरिष्टलक्षण और रोग-परिणाम के शास्त्रीय संकेत।

चिकित्सास्थान · ३०

रोग-चिकित्सा के प्रसंग, रसायन और वाजीकरण।

कल्पस्थान · १२

विशिष्ट शोधन-औषधीय कल्पनाएँ; प्रशिक्षित चिकित्सा का विषय।

सिद्धिस्थान · १२

शोधन, विशेषतः बस्ति के प्रयोग, सिद्धि और व्याप्तियाँ।

अध्यायों की बाहरी अनुक्रमणिका →

सुश्रुतसंहिता · प्रचलित पाठ में १८६ अध्याय

प्रथम पाँच स्थानों में १२० और उत्तरतन्त्र में ६६ अध्याय।

सूत्रस्थान · ४६

सिद्धान्त, यन्त्र–शस्त्र, प्रशिक्षण, व्रण-बन्धन, द्रव्य और अन्नपान।

निदानस्थान · १६

शल्य-सम्बन्धी तथा अन्य रोगों के कारण और लक्षण।

शारीरस्थान · १०

गर्भ, शरीररचना, मर्म, सिरा और धमनी का वर्णन।

चिकित्सास्थान · ४०

व्रण, भग्न, अन्य रोग, औषधीय और शल्य चिकित्सा-विचार।

कल्पस्थान · ८

विष और विष-चिकित्सा का शास्त्रीय विवरण।

उत्तरतन्त्रम् · ६६

नेत्र, कर्ण, नासा, बालरोग तथा अन्य चिकित्सा-विषय।

सूत्रस्थान ३: विषय-विभाग →

मानव जीवन और लोककल्याण में अध्ययन का उपयोग

स्वास्थ्य के प्रति सजगता

आहार, दिनचर्या, ऋतु, आचरण और रोग के कारणों पर विचार करने की परम्परा को समझना। ग्रंथ पढ़ते समय व्यक्ति, परिस्थिति और प्रमाण का महत्व पहचानना।

करुणा और चिकित्सा-शिक्षा

सुश्रुत के आरम्भिक संवाद में पीड़ित मनुष्यों की सहायता के लिए विद्या की जिज्ञासा व्यक्त होती है। आज इसका अध्ययन सेवा, उत्तरदायित्व और प्रशिक्षित चिकित्सा की आवश्यकता पर विचार करने का अवसर देता है।

द्रव्यज्ञान का संरक्षण

पत्ते ही नहीं—फल, मूल, छाल, पुष्प और सूखे द्रव्यों के उल्लेख भी खोजें। संस्कृत नाम से वनस्पति की पहचान अपने-आप निश्चित नहीं होती; क्षेत्रीय नाम, पाठ और विशेषज्ञ पहचान मिलानी होती है।

अनुसन्धान और विवेक

शास्त्रीय वर्णन ऐतिहासिक ज्ञान का स्रोत है। आज की उपयोगिता, सुरक्षा और प्रभावशीलता को अलग प्रमाण से जाँचना आवश्यक है। किसी प्राचीन प्रयोग का उल्लेख अपने-आप आधुनिक उपचार की स्वीकृति नहीं है।

धन्वन्तरि–अश्विनीकुमार · जुड़े ग्रंथ एवं मूल संदर्भ

देवता, गुरु-परम्परा, ग्रंथ का नाम और ऐतिहासिक लेखक—इनका भेद रखते हुए अध्ययन करें। / Distinguish a deity, teaching lineage, text title and historical authorship.

धन्वन्तरिनिघण्टुः · Dhanvantari Nighaṇṭu

औषधीय द्रव्यों के नाम, पर्याय और द्रव्य-विषयक अध्ययन के लिए यह एक उपयोगी आयुर्वेदीय निघण्टु है। इस पटल से इसका परिचय और बाहरी पाठ-संसाधन पढ़ सकते हैं। इसकी पूर्ण-पाठ खोज यहाँ उपलब्ध नहीं है।

धन्वन्तरिनिघण्टु का लेखकत्व पाठ-इतिहास का विषय है। पाण्डुलिपि-सूचियों और सम्पादकों में मतभेद मिलते हैं; ग्रन्थ का नाम अपने-आप दैवी लेखकत्व का प्रमाण नहीं है।

A materia-medica lexicon for studying medicinal-substance names and terminology. Its authorship requires historical study. Explore the external text resources below; full-text search is not available on this page.

NIIMH–CCRAS: आधिकारिक ई-निघण्टु खोलें →

संस्कृत–English संस्करण का पुस्तकालय अभिलेख →

Asiatic Society: पाण्डुलिपि-सूची और लेखकत्व-विवरण →

धन्वन्तरि-सम्प्रदाय और सुश्रुतसंहिता

सुश्रुतसंहिता का आरम्भ दिवोदास–धन्वन्तरि और उनके शिष्यों के संवाद से होता है। इसलिए धन्वन्तरि की शिक्षा-परम्परा को समझने के लिए यह हमारे पटल का प्रमुख स्रोत है। इससे औषधीय विद्या और शल्य-शिक्षा दोनों के प्रसंग पढ़े जा सकते हैं।

The opening dialogue of Sushruta Samhita connects its teaching tradition with Divodasa–Dhanvantari. This is a textual lineage, distinct from identifying every later work bearing the name Dhanvantari as the same author's composition.

सुश्रुत सूत्रस्थान १ का अनुवाद पढ़ें →

अश्विनीकुमार · वैदिक और संहितागत संदर्भ

अश्विनों के योगदान के लिए ऋग्वेद के अश्विन-सूक्तों और चरकसंहिता के सम्बद्ध प्रसंगों का अध्ययन करें। चरक चिकित्सास्थान के रसायन-अध्याय के चतुर्थ पाद में अश्विनों को देववैद्य के रूप में स्मरण करने वाले आख्यान हैं। ये परम्परागत कथाएँ हैं, आधुनिक चिकित्सकीय परीक्षणों के विवरण नहीं।

Study the Ashvins through Vedic hymns and relevant passages in Charaka Samhita. The resources below are those textual references; a separate medical compendium attributed to the Ashvins is not included.

ऋग्वेद १.११७.२२: मूल पाठ और अनुवाद →

चरक चिकित्सा १, चतुर्थ पाद: अश्विन-संदर्भ →

आयुर्वेद ग्रन्थ-संग्रह · Classical text library

संहिताएँ, निघण्टु और ज्ञान-परम्परा

आयुर्वेद प्रज्ञा में मूल पाठ, सरल अर्थ, द्रव्यनाम और पर्याय को संदर्भ सहित समझें। नीचे पाँच प्रमुख ग्रन्थों का परिचय है। सभी ग्रन्थों का सम्पूर्ण पाठ इस वेबसाइट में लोड नहीं है; उपलब्ध चयनित पाठ और बाहरी अध्ययन-स्रोत अलग बताए गए हैं।

Explore classical Ayurveda through its compendia and medicinal lexicons. Introductions cover five major works; local search contains selected passages, while links lead to external resources.

चरकसंहिता · Caraka Saṃhitā

आत्रेय–अग्निवेश की शिक्षापरम्परा, चरक का प्रतिसंस्कार और दृढबल की पूर्ति से सम्बद्ध ग्रन्थ। स्वास्थ्यरक्षा, आहार, रोगी-परीक्षा, कायचिकित्सा और औषधीय विचार इसके प्रमुख अध्ययन-विषय हैं।

A compendium associated with the Atreya–Agnivesha tradition, Charaka’s redaction and Dridhabala’s completion. Study health preservation, diet, examination and medical reasoning.

यहाँ उपलब्ध: सूत्र ३०.२६ का प्रयोजन-वचन; खोज में स्थौल्य २१/२२ और लेखनीय वर्ग ४/९।

चयनित संदर्भ खोजें ↑ · बाहरी अध्याय-सूची ↗

सुश्रुतसंहिता · Suśruta Saṃhitā

दिवोदास–धन्वन्तरि और शिष्यों के संवाद से जुड़ी परम्परा। शल्यविद्या के साथ शरीररचना, यन्त्र–शस्त्र, व्रण, आहार और औषधीय विषय भी हैं।

A compendium in the Divodasa–Dhanvantari teaching tradition, covering surgery, anatomy, instruments, wounds and other medical subjects.

यहाँ उपलब्ध: ग्रन्थ-मानचित्र, परिचय और खोज में स्वास्थ्य की परिभाषा (सूत्र १५/४१, दिए पाठ के अनुसार)।

विषय-मानचित्र ↓ · स्वास्थ्य का मूल अध्याय ↗

धन्वन्तरिनिघण्टुः · Dhanvantari Nighaṇṭu

औषधीय द्रव्यों के नाम, पर्याय और गुणों का निघण्टु। धन्वन्तरि से सम्बद्ध नाम और भगवान धन्वन्तरि का निश्चित व्यक्तिगत लेखकत्व अलग विषय हैं।

A medicinal lexicon for names, synonyms and traditional properties. Attribution to Dhanvantari does not establish direct divine authorship.

यहाँ उपलब्ध: CCRAS DRAVYA में उद्धृत शुण्ठी–आर्द्रक के श्लोक ८७ एवं ९१; पूर्ण निघण्टु की स्थानीय खोज उपलब्ध नहीं है।

“सोंठ” से खोजें ↑ · CCRAS मूल संदर्भ ↗

अष्टाङ्गसंग्रहः · Aṣṭāṅgasaṅgraha

वाग्भट-परम्परा का विस्तृत, गद्य–पद्यात्मक आयुर्वेदीय ग्रन्थ; आठ शाखाओं का संग्रह। यह अष्टाङ्गहृदय से अलग ग्रन्थ है।

An extensive work in prose and verse associated with Vagbhata, bringing together the eight branches of Ayurveda. It is distinct from Ashtanga Hridaya.

यहाँ उपलब्ध: परिचय और बाहरी संस्करण-सूचना; पूर्ण पाठ स्थानीय खोज में नहीं है।

संस्कृत संस्करण का पुस्तकालय विवरण ↗

अष्टाङ्गहृदयम् · Aṣṭāṅgahṛdaya

वाग्भट से सम्बद्ध अपेक्षाकृत संक्षिप्त, मुख्यतः पद्यात्मक ग्रन्थ। दिनचर्या, ऋतुचर्या, आहार, निदान और चिकित्सा सहित आयुर्वेद की आठ शाखाओं के विषय हैं। दोनों वाग्भटीय ग्रन्थों के रचयिता एक या अलग होने पर मतभेद हैं।

A concise, predominantly verse compendium associated with Vagbhata. Topics include daily and seasonal routines, food, diagnosis and treatment. The authorship relationship between the two Vagbhata works is debated.

यहाँ उपलब्ध: परिचय और बाहरी अनुक्रमणिका; पूर्ण पाठ स्थानीय खोज में नहीं है।

AYUSH: ग्रन्थ-परिचय एवं अध्याय-सूची ↗

“अष्टाङ्ग” यहाँ आयुर्वेद की आठ शाखाएँ हैं; यह पतञ्जलि का अष्टाङ्ग योग नहीं है। / Here, aṣṭāṅga refers to eight branches of Ayurveda, distinct from Patanjali’s eight-limbed yoga.

इस अध्ययन-पटल का उपयोग कैसे करें?

  1. विषय, द्रव्यनाम या श्लोकांश से खोजें।
  2. संहिता, स्थान, अध्याय और पाठ-संख्या पढ़ें।
  3. मूल वचन और हमारी संक्षिप्त व्याख्या अलग देखें।
  4. दिए गए स्रोत में आसपास का प्रसंग भी पढ़ें।
  5. द्रव्य-पहचान और उपचार के लिए विशेषज्ञ से मिलें; केवल खोज-परिणाम से सेवन न तय करें।

स्रोत एवं अध्ययन-सीमा

विषय-परिचय: चरक की ऑनलाइन अध्याय-सूची; सुश्रुत सूत्रस्थान १ और ३ का K. L. Bhishagratna (१९०७) अनुवाद। ऐतिहासिक तिथियाँ अनिश्चित होने पर नहीं दी गई हैं। खोज-परिणामों के साथ पाठ-सन्दर्भ और अध्ययन की सीमा दी गई है। पूर्ण संहिता, सभी रोग, चिकित्सकीय परामर्श और स्वतः व्याकरण-विवेचन अभी उपलब्ध नहीं हैं।

पाठ या संदर्भ में त्रुटि दिखे तो संहिता, संस्करण और पृष्ठ/श्लोक-संख्या सहित सुझाव दें।

आयुर्वेद अध्ययन के सामान्य प्रश्न · Ayurveda Study Questions

चरक संहिता और सुश्रुत संहिता के बारे में कहाँ पढ़ें?

इस पृष्ठ पर दोनों संहिताओं, उनकी परम्पराओं और प्रमुख अध्ययन-विषयों का परिचय दिया गया है। उपलब्ध खोज-अभ्यास में चुने हुए स्रोत-सन्दर्भ देख सकते हैं; सम्पूर्ण संहिताओं की खोज अभी विकास का विषय है।

This page introduces both classical works and their study traditions. The search exercise contains selected references; comprehensive corpus search is in development.

क्या यहाँ औषधि और पर्याय का अध्ययन कर सकते हैं?

द्रव्यनाम, पर्याय और मूल ग्रन्थों में उनके प्रसंग आयुर्वेद प्रज्ञा की अध्ययन-दिशा हैं। यह शैक्षिक पटल है; व्यक्तिगत रोग-निदान, औषधि-चयन और मात्रा के लिए योग्य चिकित्सक का परामर्श आवश्यक है। संस्कृत प्रज्ञा तथा पुस्तक-संग्रह से शास्त्रीय भाषा और शब्दार्थ का अध्ययन आगे बढ़ाएँ।

Medicinal terminology, synonyms and textual context form part of our educational scope. Personal diagnosis, medicine selection and dosage require a qualified practitioner.